It was 2:30 at night that I wrote the first verse, planning to go to sleep after tweeting it :)
But, the first verse didn't let me sleep, it made me work on converting itself into a poem.
Within the next half an hour, the poem was 'ready to serve' :) :)
ENJOY !!
हमारे दिल की हर ख़बर जान लेते हो,
जाने-अंजाने जब भी नज़र मिला लेते हो !
हमसे क्यों मोहब्बत की वजह पूछते हो,
कस्तूरी ख़ुद में है, बाहर क्या ढूंढते हो ?
क्या तुम भी रातों को यूँ जगा करते हो और
जग के मिलन की मन्नतें माँगा करते हो ?!
क्या मज़ा आता है, ऐसा क्यों करते हो,
लब हिला के गुफ्तगू क्यों बिगाड़ते हो ?
पहले से ही क्या कम सितम मुझपे ढ़ाते हो
जो बारिशके मौसम में और भी याद आते हो !
But, the first verse didn't let me sleep, it made me work on converting itself into a poem.
Within the next half an hour, the poem was 'ready to serve' :) :)
ENJOY !!
हमारे दिल की हर ख़बर जान लेते हो,
जाने-अंजाने जब भी नज़र मिला लेते हो !
हमसे क्यों मोहब्बत की वजह पूछते हो,
कस्तूरी ख़ुद में है, बाहर क्या ढूंढते हो ?
क्या तुम भी रातों को यूँ जगा करते हो और
जग के मिलन की मन्नतें माँगा करते हो ?!
क्या मज़ा आता है, ऐसा क्यों करते हो,
लब हिला के गुफ्तगू क्यों बिगाड़ते हो ?
पहले से ही क्या कम सितम मुझपे ढ़ाते हो
जो बारिशके मौसम में और भी याद आते हो !
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