Friday, 25 April 2014

कितना मुश्किल है !

अपनी आग को जिंदा रखना कितना मुश्किल है !
पत्थर बीच आईना रखना कितना मुश्किल है !

तलब-ए-इलाज-ए-दर्द में जिसके उम्र बिताई,
उस क़िस्से को भूलाना कितना मुश्किल है !
[तलब : search]

माना कुछ नहीं चलता 'उनके' सामने, फिर
भी हक़ीक़त में जीना कितना मुश्किल है !

पूछते हैं सब इस ज़ख्म-ए-कारी की वजह,
वो दो-तीन नाम लेना कितना मुश्किल है !
[ज़ख्म-ए-कारी : deep wound]

परस्त बना रहा जिनका उम्र भर, उनके लिए
जलवा-ए-ख़ुदाई दिखाना कितना मुश्किल है ?
[परस्त : worshipper, जलवा-ए-ख़ुदाई : divine-like magic]


PS : The first two lines have been taken from Ishrat Afreen's nazm "Apni aag ko..".
Jagjit saab & Chitra ji rendered their voices in 'Apni aag ko' from 'Beyond Time' album.

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