Friday, 25 April 2014

'नींद'

Being an insomniac,  it's my duty to write on it :)

देर रात तक जब घर नहीं आती तू, ए
'नींद', तेरी फिक्र में हम सो नहीं पाते..

यूँ अकेली ना घुमा कर, ज़माना ख़राब है,
कब क्या हादसा हो जाए, कह नहीं पाते..

कल रात तेरा चोरी से आना, खिड़की के रास्ते, देख
लिया सब ने; पड़ोसी अब मेरा भरोसा कर नहीं पाते..

देर से आना और जल्दी निकल जाना, तेरा
मुक़ाबला तो गवर्नमेंट वाले भी कर नहीं पाते !

तेरी तो लत लगी है हर एक शक्सको,
देख, तेरे बिना लोग जी भी नहीं पाते..

तेरी राह तके कितनी बज़्मों में शरीक हुए है,
तेरी नाराज़गी के डर से कुछ बोल नहीं पाते..
[बज़्म = महफ़िल]

सोचा, ये नज़्म लिखने तक तेरा आना हो जाएगा,
लेकिन, आने के बारे में तेरी सोच सोच नहीं पाते..

मोहब्बत के शेर

It was 2:30 at night that I wrote the first verse, planning to go to sleep after tweeting it :)
But, the first verse didn't let me sleep,  it made me work on converting itself into a poem.
Within the next half an hour, the poem was 'ready to serve' :) :)

ENJOY !!

हमारे दिल की हर ख़बर जान लेते हो,
जाने-अंजाने जब भी नज़र मिला लेते हो !

हमसे क्यों मोहब्बत की वजह पूछते हो,
कस्तूरी ख़ुद में है, बाहर क्या ढूंढते हो ?

क्या तुम भी रातों को यूँ जगा करते हो और
जग के मिलन की मन्नतें माँगा करते हो ?!

क्या मज़ा आता है, ऐसा क्यों करते हो,
लब हिला के गुफ्तगू क्यों बिगाड़ते हो ?

पहले से ही क्या कम सितम मुझपे ढ़ाते हो
जो बारिशके मौसम में और भी याद आते हो !

कितना मुश्किल है !

अपनी आग को जिंदा रखना कितना मुश्किल है !
पत्थर बीच आईना रखना कितना मुश्किल है !

तलब-ए-इलाज-ए-दर्द में जिसके उम्र बिताई,
उस क़िस्से को भूलाना कितना मुश्किल है !
[तलब : search]

माना कुछ नहीं चलता 'उनके' सामने, फिर
भी हक़ीक़त में जीना कितना मुश्किल है !

पूछते हैं सब इस ज़ख्म-ए-कारी की वजह,
वो दो-तीन नाम लेना कितना मुश्किल है !
[ज़ख्म-ए-कारी : deep wound]

परस्त बना रहा जिनका उम्र भर, उनके लिए
जलवा-ए-ख़ुदाई दिखाना कितना मुश्किल है ?
[परस्त : worshipper, जलवा-ए-ख़ुदाई : divine-like magic]


PS : The first two lines have been taken from Ishrat Afreen's nazm "Apni aag ko..".
Jagjit saab & Chitra ji rendered their voices in 'Apni aag ko' from 'Beyond Time' album.

Thursday, 24 April 2014

About Me

गर बदबख़्तीके बारे में ही लिखूंगा मैं,
तो औरों से क्या अलग लिखूंगा मैं?!

 [बदबख़्ती : misfortune]

Rough Translation :
If I will write about misfortune, what different will it be from others.
If I will write about misfortune, how different will I be from others.