Tuesday, 13 May 2014

"मुस्कान"

सुबह-सुबह दरवाज़े पे दस्तक हुई है,
तुझ से मिलने, देख, मुस्कान आई है..

दूर से आई है, थक-सी गई है थोड़ी,
लबों पे बिठा, देख मुस्कान आई है..

एक तेरे सिरहाने है, दुजी चाबी बहार पड़े गमले नीचे,
जाने कौन सी जादू की छड़ी घूमा के वो अंदर आई है !

जितना खर्चेगा, उतनी बढ़ेगी,
उलटा गणित सिखाने आई है..
तुझ से मिलने, देख, मुस्कान आई है..

एक उमदा मुसव्विर* है ये अपने आपमें,
ख़ाली लबों पे अपनी छवि बना आई है..
तुझ से मिलने, देख, मुस्कान आई है..
* artist, painter

रास्ता-ए-ग़म-गुरेज़* है,
फैलाने मसर्रत^ आई है..
तुझ से मिलने, देख, मुस्कान आई है..
* escape, ^happiness

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